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बिहार:राजस्व अधिकारियों का आंदोलन पड़ा नरम, Rtps सेवाएं बहाल; सरकार ने तीन दिन के अंदर काम पर लौटने कहा – Bihar Revenue Staff Strike: Minister Assures Action On Demands, Employees Told To Return To Work


मुजफ्फरपुर के मुशहरी मामले में दो राजस्व अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद चल रहे विवाद के बीच बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) ने आम लोगों को राहत देने का फैसला लिया है। संघ ने आरटीपीएस (लोक सेवाओं का अधिकार) के तहत प्रमाणपत्र जारी करने का काम फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। हालांकि, दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस के काम में डोंगल का इस्तेमाल तब तक स्थगित रहेगा, जब तक सरकार इस संबंध में स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं कर देती। इस फैसले से जाति, आय, आवासीय और अन्य जरूरी प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन करने वाले लोगों को राहत मिलेगी। वहीं, जमीन के रिकॉर्ड में नाम चढ़ाने, पुरानी प्रविष्टियों में सुधार और संबंधित राजस्व कार्यों की प्रक्रिया पर एसओपी जारी होने तक असर पड़ सकता है।

प्रमाणपत्र बनवाने का काम फिर शुरू होगा

राजस्व सेवा संघ के मुताबिक, सरकार के स्तर पर हुई बातचीत में कई मुद्दों पर आश्वासन मिला है। इसके बाद संघ ने जनहित को देखते हुए आरटीपीएस सेवाएं बहाल करने का निर्णय लिया है। इन सेवाओं के तहत राजस्व अधिकारी पहले की तरह डोंगल का इस्तेमाल कर प्रमाणपत्रों से जुड़े आवेदनों का निष्पादन और प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे। इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को खास राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें भर्ती परीक्षाओं के आवेदन के लिए नॉन-क्रीमी लेयर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के प्रमाणपत्रों की जरूरत है। शिक्षा, चिकित्सा सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी कई लोगों को समय पर प्रमाणपत्र चाहिए होते हैं।

दाखिल-खारिज और परिमार्जन प्लस पर क्या असर पड़ेगा?

दाखिल-खारिज का मतलब जमीन की रजिस्ट्री या विरासत जैसे कारणों से मालिकाना हक में बदलाव के बाद राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करना है। वहीं, परिमार्जन प्लस के जरिए जमीन के रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों और प्रविष्टियों में सुधार किया जाता है। संघ ने इन दोनों कामों में डोंगल का इस्तेमाल फिलहाल रोकने का फैसला लिया है। यह रोक आरटीपीएस के तहत प्रमाणपत्र जारी करने पर लागू नहीं होगी। यानी प्रमाणपत्र बनवाने का काम शुरू होगा, लेकिन जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े इन कार्यों के लिए स्पष्ट सरकारी दिशा-निर्देश आने का इंतजार रहेगा।

जमीन के रिकॉर्ड में गलती से बढ़ सकता है विवाद

बिहार राजस्व सेवा संघ का कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड में सुधार केवल कंप्यूटर पर जानकारी दर्ज करने का काम नहीं है। इसके लिए पुराने दस्तावेजों की जांच, संबंधित लोगों के दावों और आपत्तियों पर विचार तथा जरूरत पड़ने पर स्थल निरीक्षण भी जरूरी है। संघ के अनुसार, कई जगह रजिस्टर-2 में दर्ज जमाबंदी के रिकॉर्ड पुराने, क्षतिग्रस्त या त्रुटिपूर्ण हैं। ऐसे में वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना जल्दबाजी में रिकॉर्ड सुधारने से भविष्य में जमीन संबंधी विवाद बढ़ सकते हैं। इसी वजह से संघ ने सरकार से स्पष्ट एसओपी जारी करने की मांग की है। इसमें दस्तावेजों की जांच, स्थल निरीक्षण, विवादित जमाबंदी के निपटारे और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर स्पष्ट नियम तय करने की मांग की गई है।

मुशहरी मामले में सरकार से क्या आश्वासन मिला?

मुजफ्फरपुर के मुशहरी प्रकरण में अंचल अधिकारी महेंद्र शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण करण की गिरफ्तारी के बाद राजस्व अधिकारियों और सरकार के बीच विवाद पैदा हुआ था। संघ ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने तथा विस्तृत एसओपी जारी करने की मांग की है। बिहार राजस्व सेवा संघ के अनुसार, सरकार की ओर से संबंधित प्राथमिकी को निरस्त कराने के लिए आवश्यक कानूनी पहल करने का भी भरोसा दिया गया है। दोनों अधिकारियों को 13 अक्तूबर को न्यायालय से जमानत मिली थी। हालांकि, प्राथमिकी निरस्त करने के संबंध में अंतिम निर्णय या कार्रवाई की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का विरोध नहीं

राजस्व सेवा संघ ने स्पष्ट किया है कि वह भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करता। संघ के मुताबिक, किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के ठोस साक्ष्य मिलने पर निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उसकी मांग है कि अर्ध-न्यायिक राजस्व कार्यों में अधिकारियों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण और प्राथमिकी या गिरफ्तारी से पहले जरूरी प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों। संघ का तर्क है कि किसी राजस्व आदेश से असहमति होने पर अपील की कानूनी व्यवस्था उपलब्ध है। इसलिए आदेश से असहमति और वास्तविक आपराधिक कृत्य के बीच अंतर किया जाना चाहिए। संघ ने सरकार से भूमि के प्रमाणिक अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने और देरी की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है।

सरकार ने तीन दिनों के अंदर काम पर लौटने की अपील की

इधर, राजस्व कर्मचारियों और अमीनों की राज्यव्यापी सामूहिक छुट्टी को समाप्त कर काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है। 14 अक्तूबर को मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बिहार राजस्व कर्मचारी संघ और बिहार अमीन संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगें रखीं। मंत्री ने मांगों पर गंभीरता और सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद जनहित और जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए सामूहिक अवकाश पर गए सभी राजस्व कर्मचारियों और अमीनों से प्रेस विज्ञप्ति की तारीख से तीन दिनों के भीतर अपने-अपने कार्यस्थल पर उपस्थित होकर योगदान देने की अपील की गई है।

 



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