बिहार:समस्तीपुर के संजय की बनाई ‘आंख’ अब अंतरिक्ष से देखेगी धरती, 502 ग्राम का कैमरा जुटाएगा अहम डेटा – Samastipur Engineer Eye Reaches Space 502 Gram Mira Camera Set To Capture Earth Data Sanjay Kumar Develops
समस्तीपुर के रेलवे कॉलोनी से निकले युवा इंजीनियर संजय कुमार ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संजय कुमार की अगुवाई वाली हैदराबाद की डीपटेक कंपनी ईओएन स्पेस लैब्स का 502 ग्राम वजनी मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा ‘मीरा’ अब अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बन चुका है। स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के जरिए इसे लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाया गया है। ‘मीरा’ 10 अक्तूबर से काम करना शुरू करेगा और अंतरिक्ष से धरती की तस्वीरों के साथ महत्वपूर्ण डेटा जुटाएगा। ‘मीरा’ को तीन भारतीय इंजीनियरों की टीम ने विकसित किया है। समस्तीपुर के संजय कुमार के साथ उज्जैन के पुनीत बदेका और दक्षिण भारत के मनोज कुमार गड्डम ने वर्ष 2022 में हैदराबाद में ईओएन स्पेस लैब्स की नींव रखी थी। संजय कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उन्होंने फोटोनिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की है और ऑप्टिकल सिस्टम के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया है। टीम ने छोटे आकार और बेहद कम वजन में उच्च क्षमता वाला अंतरिक्ष इमेजिंग सिस्टम तैयार करने पर काम किया।
स्पेसएक्स के रॉकेट से अंतरिक्ष पहुंचा मीरा
कंपनी के अनुसार, ‘मीरा’ को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के ट्रांसपोर्टर-18 मिशन के साथ भेजा गया। इसे टेकमी2स्पेस के एमओआई-1ए ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट के साथ जोड़ा गया है। सिर्फ 502 ग्राम वजन वाले इस मिनिएचर स्पेस इमेजिंग पेलोड में नौ मल्टीस्पेक्ट्रल बैंड और करीब 9.2 मीटर ग्राउंड रिजोल्यूशन की क्षमता बताई गई है। कम वजन के बावजूद इसे धरती की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने के लिए डिजाइन किया गया है।
रेलवे कॉलोनी में बीता बचपन, पिता डीआरएम कार्यालय में थे कार्यरत
संजय कुमार का बचपन समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी में बीता। उनके पिता शिव बचन समस्तीपुर स्थित डीआरएम कार्यालय में कार्यरत थे। संजय की शुरुआती पढ़ाई शहर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल से हुई। वर्ष 2006 में माध्यमिक और 2008 में उच्चतर माध्यमिक परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने कोटा जाकर आईआईटी-जेईई की तैयारी की। इसके बाद उन्होंने तिरुवनंतपुरम स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी से एवियोनिक्स में बीटेक किया। फिर आईआईटी मद्रास से फोटोनिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि ऑप्टिकल सिस्टम और इमेजिंग तकनीक की ओर बढ़ती गई।
आंखों की इमेजिंग से अंतरिक्ष की ‘आंख’ तक का सफर
संजय ने पढ़ाई पूरी करने के बाद एडवांस्ड ऑप्टिक्स और इमेजिंग के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर मेडिकल सेंटर में आठ साल से अधिक समय तक अडैप्टिव ऑप्टिक्स के क्षेत्र में काम किया। इस तकनीक में प्रकाश, लेंस और इमेजिंग सिस्टम की बेहद सटीक इंजीनियरिंग की जरूरत होती है। इसी अनुभव को संजय ने बाद में अंतरिक्ष तकनीक से जोड़ा। अंतरिक्ष में कैमरा विकसित करना इसलिए चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उपकरण को कम वजन और छोटे आकार के साथ कंपन तथा तापमान में बड़े बदलाव जैसी परिस्थितियों में भी काम करना होता है।
2022 में शुरू हुई कंपनी, लक्ष्य स्वदेशी ऑप्टिकल तकनीक
संजय कुमार ने पुनीत बदेका और मनोज कुमार गड्डम के साथ 2022 में ईओएन स्पेस लैब्स की शुरुआत की। कंपनी इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड इमेजिंग सिस्टम विकसित करने पर काम कर रही है। तीनों संस्थापकों की विशेषज्ञता अलग-अलग क्षेत्रों में है। संजय ऑप्टिकल सिस्टम डिजाइन से जुड़े हैं, पुनीत प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग और मनोज कुमार गड्डम ऑप्टिकल पेलोड इकोसिस्टम व रणनीतिक साझेदारियों से जुड़े हैं। कंपनी का उद्देश्य अंतरिक्ष के साथ ड्रोन और जमीन पर इस्तेमाल होने वाले प्लेटफॉर्म के लिए छोटे आकार और कम वजन वाले उच्च क्षमता वाले इमेजिंग पेलोड तैयार करना है।
खेती से लेकर आपदा प्रबंधन तक हो सकता है इस्तेमाल
संजय कुमार का कहना है कि मीरा से मिलने वाले मल्टीस्पेक्ट्रल डेटा का इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इससे फसल की स्थिति, जमीन में नमी, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की निगरानी में मदद मिल सकती है। इसके अलावा आपदा प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें जुटाने और जलवायु से जुड़े बदलावों के अध्ययन में भी ऐसे डेटा का उपयोग संभव है। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड तकनीक निगरानी तथा रक्षा क्षेत्र में भी उपयोगी हो सकती है।
अब भारतीय नौसेना के लिए विकसित कर रहे सिस्टम
अंतरिक्ष मिशन के साथ ईओएन स्पेस लैब्स ड्रोन और ग्राउंड आधारित निगरानी प्रणालियों के लिए भी तकनीक विकसित कर रही है। कंपनी के मुताबिक उसका एक स्वदेशी हैंडहेल्ड मल्टीसाइट सिस्टम भारतीय नौसेना के लिए आईडेक्स-डीआईओ चुनौती के तहत विकसित किया जा रहा है। इस सिस्टम में अलग-अलग लक्ष्यों की लंबी दूरी से पहचान की क्षमता पर काम किया जा रहा है।
पेरिस में भी प्रदर्शित हुई कंपनी की तकनीक
ईओएन स्पेस लैब्स की तकनीक को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदर्शित किया जा चुका है। आईआईटी मद्रास की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक कंपनी को भारत इनोवेट्स-2026 के लिए चुना गया था। इसके तहत फ्रांस के पेरिस में भारतीय डीपटेक और एयरोस्पेस तकनीक का प्रतिनिधित्व किया गया।
समस्तीपुर की गलियों से अंतरिक्ष तक पहुंची कहानी
संजय कुमार की उपलब्धि की खास बात यह है कि उनकी तकनीकी यात्रा समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी से शुरू हुई। स्थानीय स्कूल से पढ़ाई करने के बाद एवियोनिक्स और फोटोनिक्स की शिक्षा हासिल की और ऑप्टिकल तकनीक को अपना विशेषज्ञता क्षेत्र बनाया। अब उनकी कंपनी अंतरिक्ष, ड्रोन और रक्षा क्षेत्र के लिए स्वदेशी ऑप्टिकल इमेजिंग तकनीक विकसित कर रही है। 502 ग्राम का मीरा कैमरा एक अक्तूबर को अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है और कंपनी के अनुसार 10 अक्तूबर से इसके काम शुरू करने की तैयारी है। समस्तीपुर के एक रेलवे कर्मचारी के बेटे से अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में पहचान बनाने तक संजय कुमार का सफर शिक्षा, शोध और तकनीकी नवाचार की कहानी है। मीरा के जरिए उनकी टीम अब अंतरिक्ष से धरती को देखने और उसके बारे में डेटा जुटाने की दिशा में काम कर रही है।

